Got a New Life

श्रीमती इन्दू गुप्ता

Smt. Indu Gupta , Ganga Nagar, Rajasthan

श्रीमती इंदू गुप्ता को 2014 में 48 वर्ष की अवस्था में जब यह पता चला कि उन्हें स्तन कैंसर है तो मानो उन पर ही नहीं पूरे परिवार के ऊपर वज्रपात हुआ | पिछले 15 महीनों में सर्जरी, 10 बार कीमोथैरेपी तथा 28 दिन तक रेडियो थैरेपी ने उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम और मानसिक रूप से निराश बना दिया। एक तरफ परेशान पति और पुत्र और दूसरी ओर 10 मिनट भी काम न कर पाने की पीड़ा और जीवन से ऊब । ऐसे में इस दम्पति को अध्यात्म साधना केन्द्र छत्तरपुर, दिल्ली में 15 जून से होने वाले 7 दिवसीय प्रेक्षाध्यान रोग निवारण शिविर के बारे में पता चला। मन में बिल्कुल भी इच्छा नहीं थी परन्तु पति ने आग्रह किया और हिम्मत बंधाई तो इस शर्त पर आने को तैयार हो गई कि यदि मन नहीं किया तो 1-2 दिन में लौट आएगें।

जब शिविर में पहुंची तो 9 दिन से बुखार था जो टूट नहीं रहा था। दिन में 3-4 बार कॉम्बीफ्लैम खाने पर भी शारीरिक पीड़ा से आराम नहीं मिल रहा था । डाक्टर ने इस शारीरिक अवस्था में शिविर में जाने के लिए एकदम मना कर दिया था। पैरों में टखने के पास वेरीकोज़ वेन्स फूलने लगी थी, वहां चमड़ी नीली पड़ने लगी थी और डाक्टर का कहना था कि इसे ठीक होने में ड़ेढ़-दो साल लगेंगे या ऑपरेशन करना पड़ेगा। सर्जरी के कारण बाये हाथ में दर्द रहता था और इम्युनिटी सिस्टम बिल्कुल कमज़ोर हो गया था, जिससे बार-बार बुखार आता था।

शिविर के पहले 3 दिन असमंजस में गुज़रे। सुबह 4:30 बजे उठना, रात को 9 बजे तक ध्यान, आसन , प्राणायाम का अभ्यास, बहुत सादा खाना और नयी जीवन चर्या... सब कुछ नया और उबाऊ लग रहा था। बस संचालकों की बार-बार प्रेरणा कि "जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा" ने हिम्मत बंधाए रखी। पति का ढांढस बंधाना भी काम आया।

चौथे दिन से जैसे चमत्कार होने लगा और पांचवे दिन के शाम तक तो मानो दुनिया ही बदल गयी। हाथ का दर्द तो याद ही नहीं कि कभी था भी। वेरीकोज़ वेन्स से झनझनाहट एकदम खत्म और चमड़ी का रंग एकदम साफ। बुखार न जाने कहा गायब हो गया। रोज 12-14 घण्टे बैठकर भी थकान का नामोनिशान नहीं । मन में पूरा विश्वास कि ‘‘अब मैं स्वस्थ हूँ और स्वस्थ रहूंगी ’’। चारों ओर जैसे प्रसन्नता ही प्रसन्नता। अब तो बस शिविर में ही रहने का मन करता है।

यह चमत्कार हुआ प्रेक्षाध्यान के प्रयोगों से । कायोत्सर्ग ने सारे तनाव को मिटाकर अवचेतन मन से जोड़ दिया। ध्यान और अंतरयात्रा ने सुषुम्ना को जागृत कर दिया। और चैतन्य केन्द्रों की प्रेक्षा ने मानो ऊर्जा के स्रोतों (energy centers) को पुनः जागृत कर दिया। चैतन्य केन्द्रों पर अलग-अलग रंगों का ध्यान एकदम चमत्कार पैदा करता है । रही सही कसर पूरी कर दी छोटे-छोटे एक-एक अक्षर के बीज मंत्रों के चैतन्य केन्द्रों पर रंग सहित ध्यान ने । संभवतः यही एक ऐसा केन्द्र है जहां पर रोग निवारण के लिए बहुत ही सरल और वैज्ञानिक तरीके से मंत्रों का प्रयोग कराया जाता है। कोई भी व्यक्ति थोड़े ही समय में मंत्रों की झंकार अपने भीतर महसूस कर सकता है। इन सबको साथ मिलाकर जब स्वस्थ्य होने की गहरी भावना जिसे अनुप्रेक्षा का नाम दिया गया है का प्रयोग किया जाता है तो व्यक्ति मानो स्वस्थ्य होकर ही इस प्रयोग से बाहर निकलता है।

मैं इंदू गुप्ता और मेरे पति श्याम गुप्ता इसे अकल्पित नया जीवन दान ही मानते है । हम तो चाहते है कि इस प्रयोग से हर व्यक्ति जल्दी से जल्दी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करें और सबसे जरुरी बात यह है कि नयी पीढ़ी के अंदर इसकी जानकारी और संस्कार पैदा करना जिससे रोग का जन्म ही न हो।

अध्यात्म साधना केन्द्र गत 50 वर्षों से आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा विकसित भगवान महावीर की प्रेक्षाध्यान पद्धति के प्रचार प्रसार में लगा हुआ है। लाखों लोग इससे लाभांवित हो चुके है।

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